हर पल हलचल, पल-पल हलचल
कहे ज़िन्दगी चल आगे चल,
चल आगे चल, चल आगे चल

है तो सब-कुछ मगर नहीं कुछ
अगर नहीं संतोष कहीं है
स्वर्ग कही नहीं आसमान में
ढूँढो वो तो यही-कही है
मन खुश है तो तन भी है खुश
तन खुश पर काहे का अंकुश
अंकुश सदा ही बुरा न रहता
बुरे-भले की समझ वो कहता
इससे शिक्षा लेता तू चल
हर पल हलचल पल-पल हलचल ………..

शुद्धि मन की, है सिद्धि तन की
अशोक ये सब से कहता है
तब तक शांति-समृद्धि न मिलती
जब तक मन मैला रहता है
जन सेवा भारी बलशाली
किन्तु सोच न हो छल वाली
छल से गल जाती है आत्मा
निश्छल चाल होए मतवाली
यही चाल देती सबको बल
हर पल हलचल पल-पल हलचल……

कहे ज़िन्दगी, चल आगे चल,
चल आगे चल, चल आगे चल
हर पल हलचल पल-पल हलचल
–कवि अशोक कश्यप

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